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संत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी प्रस्थान

संत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी प्रस्थान, आदमी: आह बहू आज कितने दिन बाद तू मेरा लौड़ा चूस रही है। मैं तो तरस ही गया था इस सुख के लिए। ये घर में साले इतने मेहमान आ गए हैं की हमारी चुदाई भी नहीं हो पा रही है। ये सब बातें अभी चल ही रही थी कि मुझे पेशाब आने लगा और मैं मूतने को जाने के लिए उठने लगी मैं अभी उठने की कोशिश कर ही रही थी और जब मैं उठने लगी तो मेरी चूत मे जबरदस्त दर्द होने लगा और मैं उठ ना सकी मैने दीदी को कहा दीदी मुझसे उठा नही जा रहा है.

आरज़ू - अम्मी देखो आजकल जाड़े का वक़्त है मूँगफली वाले निकलते ही रहते है, आप कहो तो बुला लूँ किसी को बेचारे को थोड़े पैसे दे देंगे। राजीव: अगर मैं नहीं कर सकता तो तुम कर लो। बेटा, घर में एक औरत होनी ही चाहिए। घर औरत के बिना अधूरा होता है।

हां, तो दोस्तों यह मेरी पहली चूत चुदाई की कहानी थी। उम्मीद करता हूं कि आप लोगों को पसंद आयी होगी। पढ़ने के लिए धन्यवाद। संत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी प्रस्थान फिर इस बार दीदी जीत गई। जब मैंने मालिश शुरू की तो दीदी ने उल्टी होकर धीरे धीरे अपना पजामा और कच्छा नीचे कर दिया। दीदी की दूध जैसी सफेद गाण्ड देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गये और मेरे लन्ड से कुछ चिपचिपा पदार्थ रिसने लगा।

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  1. लेकिन अभी कुछ समय पहले ऐसा टाइम आया कि मैं शर्मिंदगी महसूस कर रहा हूं आप से सुझाव भी चाहता हूं कि क्या जो हुआ और जो हो रहा है उसे कंटिन्यू करू या मैं गलत कर रहा हूं?
  2. मैंने उसका हाथ पकड़ा और कहा- रुको ! मैं मदद कर देता हूँ ! मैंने टी-शर्ट उतारी और जींस का हुक खोल कर उसकी चूत के ऊपर ही हाथ फ़िराने लगा। उसे अच्छा लग रहा था। वो एकदम से उत्तेजित होने लगी और नीचे झुक कर मेरे पैंट में से लण्ड निकाल कर चूसने लगी। मेरा रोम-रोम खड़ा हो गया। मैं भी उसके स्तन दबाने लगा। సెక్స్ వీడియో హెచ్ డి
  3. मैं भगत से सारा दिन चिपकी रहती थी कभी नंगी.. तो कभी कपड़ों में.. हम सारा दिन सारी रात चुदाई करते थे, हमने पूरा हफ्ता बहुत सेक्स किया। रिया : हां भैया मुझे भी काफी रिलॅक्स फील हो रहा है. अब तक मैं भी तुझ से बात करने से डरती थी. मगर अब मैं भी तुझ से अपनी बातें शेयर कर सकती हूँ. और अब तो तू मुझ से चीटिंग भी नहीं कर सकता क्यों की मुझे तेरा सीक्रेट पता है.
  4. संत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी प्रस्थान...लेकिन वो भी कम नहीं थी, उसने मेरी तीसरी टांग को पकड़ लिया था। इससे पहले मैं कुछ करता, वो मेरी ज़िप खोल चुकी थी और मेरा लण्ड चूस रही थी। अब इस सब में 20 मिनट निकल चुके थे और अब मेरा निकलने को तैयार था. फिर तभी वो बोली कि में तो हो गयी और फिर में और ज्यादा ज़ोर से धक्के देने लगा. फिर करीब 5 मिनट के बाद मेरा पानी निकला और मैंने उनकी पूरी चूत को अपने पानी से भर दिया.
  5. फिर मैंने उससे कहा कि इस पर थोड़ा सा थूक लगा दो.. तो वो कहने लगी कि में कैसे लगाऊँ? तो मैंने कहा कि इसे मुँह में लेकर अपने थूक से गीला कर दो.. उसे थोड़ा अजीब लगा.. लेकिन अपने मुंह में लंड लेकर लोलीपोप की तरह चूसने लगी.. ऐसा लग ही नहीं रहा था कि वो पहली बार कर रही है. अब वो पीछे हटा और थोड़ी दूर से उसके गोरे बदन को काली ब्रा और काली ही पैंटी में देखकर मस्ती से अपना लौड़ा मसलने लगा। सरला की निगाहें भी उसके फूले हुए हथियार पर थी और उसकी पैंटी गीली होने लगी थी।

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राज मेरे पास बिस्तर पर आ गया। मैंने अपनी दोनो टांगे ऊपर उठा दी और चूत खोल दी। राज ने आराम से बैठ कर अपना लण्ड हाथ से घिसा और हिला कर चूत के पास रख दिया। मैं मुस्कुरा उठी.... उसे ये नहीं पता था कि लण्ड कहां रखना है.... मैंने उसका लण्ड पकड़ कर चूत पर रख दिया।

उफफ्फ्फ्फ़ ...माँ..तुम नंगी बिना कपड़ों के किसी मस्त, कितनी सुंदर और कितनी चुदक्कड़ आईटम लगती हो!! गौरव बोला Usne thoda sharmate huye apni jeans khol di aur uski jaalidar penty se uski choot bilkul saaf saaf dikh rahi thi. Usne apni chut ke baaol ko shave kiya hua tha. Maine use mere underwear utaarne ko kaha to usne jaise hi mera underwear khola, wah lund dekh kar hairaan ho gayee.

संत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी प्रस्थान,मुझे अब परेशानी हो रही थी शायद इसलिए कि बेड के पीछे जगह कम थी और दो दो हसीनाएं मेरे साथ काम-क्रिया कर रही थी।

मैं उदास तो हुआ लेकिन मैंने अपना मोबाइल का नम्बर एक कागज पर लिख के उसे पकड़ा दिया और कहा की तुम्हे मेरे से बात करना अच्छा लगे तो कॉल करना मुझे अपने गाँव से.

फिर सब बाहर आए और शिवा ने कार में सामान डाला और कार चलाकर घर की ओर चल पड़ा। राजीव और महक पीछे की सीट पर बैठे थे। महक ने राजीव का हाथ अपने हाथ ने ले लिया और बोली: पापा। आप माँ को बहुत मिस करते होगे ना?ఎక్స్పోజింగ్ వీడియోస్

क्या नज़ारा था मेरा सूमो नर्म उँगलियों के बीच खेल रहा था, नताशा मेरे कंधे पर सर टिकाये हुए थी और मेरा हाथ उसकी टी शर्ट के अन्दर सहलाने में लगा था। मैं जिस तरह पहले चुदी थी ..... उसी अन्दाज़ में उसे भी चोदती रही...... फ़िर उसकी चूत में डिल्डो डाल कर उसकी मस्ती बढाने लगी .... वो डिल्डो से चुदा कर शान्त हो गई। उसका मन अब भर गया था .... वो सन्तुष्ट हो गई थी ...

ओह फ़िर तो मजा ही आ गया भाई मै उछलता हुआ बोला.. सब मेरे को आश्चर्य भरी निगाहों से देखने लगे सो मै आगे बोला वो.. वो.. क्या है की मुझे भी कपूर साहब के बेटे यानि सुमित की शादी मै जाना है..

सुबह जब मैं जागा तो दीदी मेरे लंड को चूस रही थी, मुझको प्यासी आँखों से देख रही थी और मेरा लौड़ा खड़ा करके उसके ऊपर बैठ गई और फिर दुबारा से मैंने दीदी को चोदना शुरु कर दिया।,संत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी प्रस्थान मैंने कहा- इतनी प्यारा चेहरा, नशीली आंखें, गुलाबी होंठ, सुराहीदार गर्दन, रसीले चूचे, मस्त बदन, गदराई गाण्ड, रेशमी बाहें, और खूबसूरत चिकनी टांगें और कोई खुदा से क्या मांग सकता है।

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