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आर्थिक आणीबाणी म्हणजे काय

आर्थिक आणीबाणी म्हणजे काय, ठीक है भाभी, आपके भैया को देख लिया, अब आपके सैयाँ को भी देख लूंगी… किसी खिलती छिनार जैसे अपने चूतड़ मटकाकर वह बोली और चली गयी। अवी- स्वीटी की बात सुन कर अवी दम सन्न रह जाता है और अपने मन मे सोचता है स्वीटी जैसी दिखती है उससे कही ज़्यादा बदमाश और चालाक है, मौका लगने पर यह मेरे बहुत काम आ सकती है इससे मुझे अपने रीलेशन और गहरे कर लेना चाहिए,

उसके बात करने के ढंग से काजल को भी यही लगा कि यह प्रमोद नहीं हो सकता क्योंकि वो तो अलग ही अंदाज में बात करता है और इसकी आवाज़ भी उससे नहीं मिलती। हाँ हाँ, अब तो आप कहोगी ही कि गलती से हो गया… अब इसे साफ़ कौन करेगा? मैंने भी बनावटी गुस्सा दिखाते हुए कहा।

प्रिया शरमा कर मुझसे लिपट गई। मैंने उसे अलग किया और अपनी बाहों का सहारा देकर वापस बिस्तर पर लिटा दिया… आर्थिक आणीबाणी म्हणजे काय काजल- बस यार ये नाटक मत कर.. मुझे पता है तूने अपने मॉम-डैड को ही देखा होगा.. इतने साल पहले.. तो वही देख सकती है। मैंने भी बहुत देखा है अपनी मॉम को डैड से चुदवाते हुए.. उनकी फिल्म देख कर ही तो मैं सब सीखी हूँ।

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  1. मैंने अपना सर थोड़ा सा ढीला किया और अपनी जीभ को चूत के ऊपर से नीचे तक चाटने लगा और बीच बीच में उनके दाने को अपने होंठों से दबा कर चूसने लगा। दानों को जैसे ही अपने होंठों में दबाता था तो आंटी अपने पैरों को फैलाकर चूत को रगड़ देती थी।
  2. अवी उसके हाथ से लॉक ले लेता है और डिंपल उसके साइड से घर के बाहर जाने लगती है और अवी जब अपनी दीदी के गदराए हुए सेक्सी हिंदी बोलने वाला
  3. जय- अबे मैं कोई बच्चा हूँ क्या.. जो उसकी बातों में आ जाऊँगा? ये सब जाने दे.. ला बियर पिला.. साली ने सारी बियर लौड़े से चूस कर निकाल दी है। मैं अपने कमरे में आ गया और अपने कंप्यूटर पे बैठ गया। मेज पर वही प्लेट रखी थी जो प्रिया छत पर लेकर गई थी। मैंने सोच लिया था कि आज रात इस गुलाब जामुन का सारा रस प्रिया की चूत में डालकर चाट जाऊँगा। मैं यही सोच कर ही उत्तेजित हो गया था।
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  5. नमस्ते सायरा जी,आप केसी हैं मुझे गुम सूम हालत में खड़े होने के बावजूद विनोद ने मेरे सामने आते ही अपने दोनो हाथ जोड़ कर मुझे खालिस इंडियन स्टाइल में सलाम किया. काजल- ओ सती सावित्री.. तू भी तो बड़ी शरीफ़ बनी घूमती है.. क्या तुझे कुछ नहीं पता.. मैंने बताया था ना.. मैं सेक्स के बारे में ज़्यादा नहीं जानती थी.. मगर ऐसे सीन को देख कर पता ना लगे कि क्या हो रहा है.. मैं इतनी भी नादान नहीं थी।

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तुम्हारे किचन से उठकर आने के बाद से अब तक मैं यही बात सोचती रही हूँ, कि तुमको अपनी बहन के साथ यह सब कुछ नही करना चाहिए था अफ़ताब मेरी बात के ज्वाब में अम्मी ने अपनी नज़रें ऊपर करते हुए मेरी आँखों में देखा और मुझसे ट्यूबवेल पर मेरी और संध्या की चुदाई की बात दुबारा स्टार्ट कर दी |

अम्मी की बात सुनते ही मैं तेज़ी से संध्या के पीछे आया और घोड़ी बनी अपनी बहन की खुबसूरत गांड के दरमियाँ में अपना लौड़ा रगड़ने लगा | डिंपल- अरे क्या तू पागल हो गई है जो अनब शनब बके जा रही है, कही भी दिखाई नही दे रहे है पता नही कहाँ जा

आर्थिक आणीबाणी म्हणजे काय,विजय ने रानी को बिस्तर पर लेटा दिया अब वो उसके मम्मों को कपड़े के ऊपर से चूसने लगा था। रानी तो बस जन्नत की सैर पर निकल गई थी।

हरिया- अरे बाप रे, वो कहाँ से आ गई.. साली रंडी.. यार ऐसा मौका दोबारा मिले तो मुझे भी बुलाना.. उसकी चूत देखने की बड़ी तमन्ना है मेरी.. दिल करता है साली को उठा के ले जाऊँ।

रघु- अरे फिर होना क्या था कुछ देर चाची ऐसे ही करती रही फिर उसने खुद ही मेरा हाथ पकड़ कर अपने मोटे-मोटेसेक्सी वीडियो डाउनलोडिंग एचडी

अवी- लेटा हुआ अपने मन मे दीदी तुम समझती क्यो नही कि मैं तुम्हे कितना चाहता हू, काश मैं तुम्हे अपने सीने से स्वीटी- मुस्कुराते हुए मगर क्या, लगता है तुम नही चाहते कि तुम अपनी दीदी को जितना लाइक करते हो उसे उस बात का पता ना चले

हम बड़े ही सुकून से एक दूसरे को चूमने का आनन्द ले रहे थे। मेरे हाथ अब आंटी की पीठ पर थे और साड़ी तथा ब्लाउज के बीच के खाली जगह को अपनी उँगलियों से गुदगुदा रहे थे। जैसे जैसे मेरी उँगलियाँ उनकी कमर पे घूमते, वैसे–वैसे उनका बदन थिरकने लगता।

इससे अच्छी क्या खबर हो सकती थी कि जिसके सपने देख कर मैं सोया था वो खुद ही सुबह सुबह मेरी आँखों के सामने है। यह सोचकर मैं मुस्कुरा कर फ्रेश होने के लिए बाथरूम में घुस गया।,आर्थिक आणीबाणी म्हणजे काय अब रानी को क्या पता था कि जय 200 रुपये में उसकी इज़्ज़त का सौदा कर रहा है। बेचारी उसकी बातों में आ गई.. आगे का हाल आप खुद ही देख लीजिए।

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