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महाविकास आघाडी सरकार

महाविकास आघाडी सरकार, हां हांआंआंआंआंआं, बोलूंगी, अगर अंकल मुझे नहींईंईंईंईंईंईंई चोदेंगे तो बोलूंगी्ई्ई्ई्ई्ई। शहला आनंदमुदित चुदते हुए बोली। इस घड़ी को उसका मस्तिष्क पहले भी देख चुका था। घड़ी में अब 3.40 हो रहे थे। प्रधानमंत्री की हत्या होने में सिर्फ बीस मिनट बाकी थे।

ओह मां्आं्आं्आं, बस बस, आज का हो गया। अब कल, छुट्टी है तो क्या हुआ, आ जाना, घर बनाने के काम से नहीं, मेरा काम करने। मैं रफीक से चिपकी एकदम रंडीपन पर उतर आई थी। नेहा को बिल्कुल हैरानी नहीं हुई क्योंकी उसने सब सुना था जो उसने सुनील से पहले कहा था। नेहा को पता था कि वो अटेंडेंट उसको एक कालगर्ल समझ रहा था। तो जवाब में नेहा ने उससे आराम से कहा- मैं वैसे लड़की नहीं हूँ माई डियर..

तभी कमला रानी मखानी के कान के पास मुंह ले जाकर कुछ बोली। | उसी पल मखानी का लटका चेहरा खुशी से खिल उठा। वो बोला। महाविकास आघाडी सरकार आ्आ्आ्आ्ह्ह्ह्ह््ह््ह््हह्हह, ओओ्ओओ््ओओ््हह्ह्ह्ह, र्र्र्र्आ्आ्न्नी्ई्ई्ई्ई्ई स्स्स्स्स्स्आ्आ्आ्आ्आली्ई्ई्ई्ई कुत्त्त्ती्ई्ई्ई्ई, तेरी्ई्ई्ई्ई चू्ऊ्ऊ्ऊ्ऊ्ऊत, आ्आ्आ्आ्ह्ह्ह्ह मस्त चू्ऊ्ऊ्ऊ्ऊ्ऊत, आ्आ्आ्आ्ह्ह्ह्ह टाईट चू्ऊ्ऊ्ऊ्ऊ्ऊत। ऐसा लगा मानो मेरी पसलियों का चूरमा बना डाला हो।

वीडियो का हिंदी अर्थ

  1. राम- यह सब फजूल की बातें हैं। असल जिंदगी में औरत को एक तगड़ा लण्ड चाहिए होता है, और कुछ नहीं। आप जितना भी पैसा दे दो या कुछ भी। दे दो, पर जो सुख औरत को एक तगड़े लण्ड से मिलता है वो किसी और इस दुनियांवी चीज में नहीं मिल सकता।
  2. उसके बाद दोनों में बातचीत हुई। बाप ने नेहा से उसके भाइयों के बारे में पूछा। नेहा बताने से हिचकिचा रही थी। तो बाप ने कहा- वो सुनील के घर गया था जिस वक्त सुनील उसको चोद रहा था और उसने सब कुछ देखा। भारतीय घटनेचे शिल्पकार कोण
  3. मेरे पास एक सी.डी. है। उसे देखोगे तो तुम समझ जाओगे। तीन करोड़ में उसने तुम्हारी हत्या का ठेका लिया है। ये तो अच्छा हुआ कि मैं तुम्हें जानता हूं, वरना मोना चौधरी ने चुपके से तुम्हारा गला काट देना था। रामू उसका हाथ पकड़ लेता है। रूबी अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करती है। पर रामू ने हाथ को अच्छे से पकड़ रखा था। रूबी का नाजुक हाथ रामू के कठोर हाथ में पिस रहा था।
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  5. बस, इसी तरह न जाने और कितनी लड़कियां, महिलाएं तेरे जैसे खूबसूरत गबरू जवान की बांहों में समा जाने को आतुर होंगी। जरा नजर उठा कर देखने की जरूरत है तुझे। समझा कि नहीं मेरे नादान बेटे? मैं बेझिझक अपने बेटे को प्रोत्साहित कर रही थी बिंदास, अपना शिकार खुद खोज खोज कर शिकार करने के लिए। मेरी खातिर, अपनी खातिर, सोबरा से कहकर मैं तुमकों वापस तुम्हारी दुनिया में भिजवा दूंगा। यहां से उठो। आधे से ज्यादा रास्ता पार हो गया है। शाम तक हम सोबरा की जमीन पर होंगे।

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इससे उसे इस बात की आज्ञा नहीं मिल सकती कि बो तवेरा पर नजर रखे। जथूरा पास में होता तो मुझे इस बात से कोई मतलब नहीं था। परंतु अब तवेरा की देखभाल की जिम्मेवारी मुझ पर है। मेरा फर्ज है कि जथूरा की गैरमौजूदगी में सब ठीक रखें।

मैं नहीं जानता, परंतु वो शक्ति जो भी है, जथूरा की दुश्मन ही होगी। तभी तो तुम्हें जथूरा के खिलाफ भड़का रही है। क्या कहने। जगमोहन व्यंग से कह उठा। घोड़े की टापों की आवाज करीब आ गई थी। वो सब वहीं खड़े नज़रें घुमाते रहे। तभी कोचवान बोला।

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वह दर्द के मारे बिलबिला कर जोर से चिल्ला उठी, आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह फाड़ दिया रे फाड़ दिया मेरा बूर. मार दिया मा्आ्आ्आ.घरापुढे कोणती झाडे लावू नये

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