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एक्सएक्सएक्सएक्स, बबलू ने उसकी ब्रा के हुक्स को खोल दिया रेणु ने अपनी ब्रा को अपने हाथों से थामे रखा बबलू ने अपने दोनो हाथों से रेणु के कंधों को पकड़ लिया और रेणु की नेक को किस करने लगा उसने एक बार भाभी की ओर नजर उठाकर देखा शायद पूछ रहा था कि क्या आगे बढ़ुँ पर कामया की आखों में एक हैरत भरी और जिग्याशा होने के कारण वो वापस भोला की ओर मुड़ गया और अपने हाथो को फिर से उसके कंधो पर घुमाने लगा था

राजीव: हाँ बहू यही बात है। अब तुम उसकी मदद कर दो और अगर उसे यहाँ दो घंटे के लिए आने दो और मुझसे चुदवाने दो तो उस बेचारी को माँ बनने का सौभाग्य प्राप्त होगा और मुझे भी फिर से एक जवान बदन को चोदने का सुख मिलेगा। बबलू ने अपना लंड को धीरे-2 अंदर बाहर करना चालू कर दिया कुछ ही देर में बबलू का लंड रेणु की चूत में पूरा अंदर बाहर होने लगा और सीधा जाकर रेणु की बच्चेदानी से टकराने लगी

सब ख़ुश हो गए। मुन्नी उससे आकर लिपट गयी और बोली: थैंक्स जीजा जी। शिवा ने भी प्यार से उसके गाल सहला दिए। एक्सएक्सएक्सएक्स शिवा उसके क़मर को सहला कर: सच कहूँ मज़ा आ गया उनकी मस्ती देख कर । क्या मज़े से चु- मतलब सेक्स किया उन्होंने। क्या हम भी इतना ही मज़ा लेंगे?

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  1. राजीव ने अपने बेडरूम का दरवाज़ा बंद किया और तिजोरी से हीरे के तीन सेट निकाले और कुछ सोने के भी निकाले । फिर वह उनको देखकर सोचने लगा कि सरला पर कौन सा ear ring अच्छा लगेगा। फिर उसने एक हीरे का कान का झुमका पसंद किया। अब वह तय्यार था सरला का दिल जीतने के लिए।
  2. अचानक आयशा ने महसूस किया कि अब शिवा जोश में आकर नीचे से अपने लंड का धक्का मारे जा रहा था। आयशा भी मस्ती से : उन्न्न्न्न्न्न उन्न्न्न्न्न उफ़्फ़्फ़्फ़् निकल रही थी। वो भी उछल कर चुदवा रही थी। हम आपके है कौन फुल मूवी डाउनलोड
  3. मालिनी हँसकर उसके लौड़े को दबाकर बोली: इससे करवाने मतलब चुदवाने आ रही है। चलिए अब छोड़िए इनको भी उठाना है। बस बहुत हो गई आपकी ज़बरदस्ती और फ़ालतू की मस्ती। राजीव: अगर तुमने मज़ा किया तो यह सामान्य बात है। और अब दिन में उसके जाने के बाद तुम मुझसे मज़ा लो तो भी वह समान्य बात हो सकती है। है ना?
  4. एक्सएक्सएक्सएक्स...महक की आँखें पापा के लौड़े से, जो कि रानी की बुर के अंदर बाहर हो रहा था, हट ही नहीं पा रही थी। पापा का लंड पूरा गीला सा होकर चमक रहा था। रानी की घुटी हुई चीख़ें गूँज राकेश अपने लौड़े को दबाकर बोला: आऽऽऽह मेरा तो सोच कर ही खड़ा हो गया। फिर मम्मी के पास वापस जाना पड़ेगा।
  5. मालिनी: पापा जी, मैं नहीं जानती कि सच क्या है और क्या ग़लत , पर सच में मम्मी ने मुझे बहुत ठेस पहुँचाई है। मैंने कभी भी नहीं सोचा था कि वह इस तरह का व्यवहार या बातें कर सकती हैं। और ताऊजी भी ऐसे कर सकते हैं। जैसे ही वो उठी राजीव ने उसकी नायटी के ऊपर से उसकी मस्त गाँड़ को अपने पंजों में भर लिया और दबाकर बोला: आऽऽऽह बेटी कब चुदवाओगी मुझसे ? सच बहुत मन करता है तुम्हारी जवानी का मज़ा लूटने का।

100 सेंटीमीटर में कितने इंच होते हैं

बबलू के धक्को की रफ़तर बढ़ चुकी थी रिंकी भी अब झड़ने के बिल्कुल करीब थी उसने बबलू को कस के पकड़ लिया उसका बदन ऐंठने लगा

ये आवाज़ शिवा को भी सुनाई दी तो वो बोला: क्या बात है कि पापा आज तुमको बेटी बोल रहे हैं वैसे अक्सर तो बहु बोलते हैं ना? देखो पापा की बेटी बन कर मेरा पत्ता नहीं साफ़ कर देना। हा हा । मालिनी आयशा से मिलने का सोचकर थोड़ा उत्तेजित होने लगी थी। ख़ैर थोड़ी देर बाद राजीव वापस आया और अपने हाथ में एक मिठाई का डिब्बा लाया था। वो राजीव के पीछे पीछे उसके कमरे में गयी और पूछी: पापा क्या लाए हैं?

एक्सएक्सएक्सएक्स,फिर दोनों ने अपना लौड़ा पैंट में ठीक किया और सब बाहर आए। राजीव भी शिवा के साथ कार में आगे बैठा और मालिनी पीछे बैठी। अब राजीव पीछे मुड़कर बोला: बेटा ज़रा जाँघों को फैलाओ तो।

अब शिवा ने उसकी ब्रा खोलने की कोशिश की, पर खोल नहीं पाया। वह बोला: ये कैसे खुलता है? मुझसे तो खुल ही नहीं रहा है।

अंदर मालिनी शाल लपेटी पापा के सामने वैसे ही चल रही थी जैसे अभी वो उसके कमरे में चल कर दिखाई थी। राजीव बिस्तर पर बैठे लूँगी के ऊपर से अपने तने लंड को सहला रहा था। वो बोला: बेटी, शॉल उतारो ना। अपनी जवानी का जलवा दिखाओ ना।शेर का नाखून का कीमत

राजीव: ठीक है बेटी, पर एक बात और है कि मैंने अब तेरी चूचियाँ नहीं देखी हैं। एक बार उनको दिखा दे और चुसवा ले। शिला: अरे मैं तुम्हारे घर के पास ही आयी हूँ। तभी तुम्हारी याद आइ। अगर तुमको कोई परेशानी ना हो तो चाय पीने आ जाऊँ?

यह कहकर मैं एक काउंटर जे पीछे पहुँचा और वहाँ रखे ब्रा और पैंटी को दिखाकर बोला: बताइए किस पैटर्न में दिखाऊँ?

काफ़ी पीने के बाद वो दोनों उठे और लिफ़्ट में एक बार फिर राजीव उसकी चूचियों को जो बाहर झाँक रहीं थी झुककर चूमने लगा। उसके हाथ अब भी उसकी गाँड़ पर ही घूम रहे थे। लिफ़्ट से बाहर आकर दोनों कार में बैठे और घर की ओर चल पड़े।,एक्सएक्सएक्सएक्स कामया को भी ऋषि अच्छा लगा और दोनों में एक अच्छा रिस्ता बन गया था पापाजी से भी मिलवाया ऋषि थोड़ी देर तक बैठा हुआ वो भी उनके काम को देखता रहा और बीच बीच में जब उसकी आखें कामया से मिलती तो एक मुश्कान दौड़ जाती उसके चहरे पर

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